रात 2 बजे का हाईवे सफर: एक अनजानी खौफनाक औरत

रात 2 बजे का हाईवे सफर

उस रात घड़ी ने जैसे ही 2 बजने का इशारा किया, पूरा हाईवे एक अजीब खामोशी में डूब गया था। दूर-दूर तक कोई गाड़ी नहीं, सिर्फ मेरी कार की हेडलाइट्स और अंधेरा… इतना गहरा कि लगता था जैसे निगल जाएगा।

मैं, रोहित, एक लंबा सफर तय कर रहा था। काम से देर हो गई थी, और अब घर पहुंचने की जल्दी में मैंने इस सुनसान रास्ते को चुना। मुझे नहीं पता था कि ये फैसला मेरी जिंदगी का सबसे खौफनाक अनुभव बनने वाला है।

रात 2 बजे का हाईवे सफर: एक अनजानी खौफनाक औरत

अचानक दिखी वो औरत

कुछ किलोमीटर आगे बढ़ने के बाद, मेरी नजर अचानक सड़क के किनारे खड़ी एक औरत पर पड़ी। उसने सफेद साड़ी पहन रखी थी और उसके बाल चेहरे पर बिखरे हुए थे।

उसकी खामोश खड़ी आकृति किसी अजीब डर को जन्म दे रही थी। रात के इस वक्त, इस वीरान हाईवे पर… कोई औरत अकेली क्यों खड़ी होगी?

मैंने ब्रेक लगाने के बारे में सोचा… लेकिन दिल ने कहा, "मत रुक।" फिर भी, इंसानियत के चलते मैंने गाड़ी धीरे कर दी।

लिफ्ट की मांग

जैसे ही मैंने गाड़ी उसके पास रोकी, उसने धीरे से अपना चेहरा उठाया। उसकी आंखें… बिलकुल खाली थीं, जैसे उनमें कोई जान ही नहीं हो।

"मुझे आगे तक छोड़ दीजिए…", उसकी आवाज धीमी और ठंडी थी।

मेरे हाथ स्टीयरिंग पर कांपने लगे। लेकिन मैंने खुद को संभाला और उसे बैठने का इशारा किया। वो चुपचाप पीछे की सीट पर बैठ गई।

अजीब खामोशी

गाड़ी फिर से चलने लगी। लेकिन अब माहौल बदल चुका था। अंदर एक असहज सन्नाटा था, जो कानों में गूंज रहा था।

मैंने रियर व्यू मिरर में देखा… वो औरत सिर झुकाए बैठी थी। उसके बाल पूरे चेहरे को ढक रहे थे।

"आप कहां उतरेंगी?", मैंने पूछा।

कुछ सेकंड तक कोई जवाब नहीं आया। फिर अचानक…

"जहां तुम जाओगे… वहीं।"

मेरे दिल की धड़कन एक पल के लिए रुक गई।

गायब होती परछाईं

मैंने फिर से शीशे में देखा… लेकिन इस बार पीछे की सीट खाली थी।

मैंने घबराकर ब्रेक मारा। गाड़ी सड़क के बीचों-बीच रुक गई। मैंने पीछे मुड़कर देखा… कोई नहीं था।

"ये कैसे हो सकता है…?"

तभी… किसी ने मेरे कंधे पर हाथ रखा।

पीछे नहीं… बगल में

मेरी सांसें थम गईं। मैंने धीरे-धीरे सिर घुमाया…

वो औरत अब मेरे बगल वाली सीट पर बैठी थी।

उसका चेहरा अब साफ दिख रहा था। उसकी आंखें पूरी तरह काली थीं… और उसके होंठों पर एक हल्की मुस्कान थी, जो किसी इंसान की नहीं लग रही थी।

"मैंने कहा था ना… जहां तुम जाओगे…"

उसकी आवाज अब मेरे कान के बहुत करीब थी।

हाईवे का रहस्य

मैंने डर के मारे एक्सीलेरेटर दबा दिया। गाड़ी तेज रफ्तार से भागने लगी। लेकिन रास्ता जैसे खत्म ही नहीं हो रहा था। वही पेड़, वही मोड़… बार-बार सामने आ रहे थे।

मुझे समझ आ गया… मैं कहीं फंस चुका हूं।

तभी उसने धीरे से कहा,

"ये वही जगह है… जहां मेरी मौत हुई थी।"

मेरे पूरे शरीर में सिहरन दौड़ गई।

भयानक सच्चाई

उसने अपनी कहानी सुनानी शुरू की। सालों पहले, इसी हाईवे पर एक कार ने उसे टक्कर मार दी थी। ड्राइवर भाग गया… और वो यहीं तड़प-तड़प कर मर गई।

"तब से… मैं हर उस इंसान को रोकती हूं… जो इस रास्ते से गुजरता है।"

"ताकि वो मेरी मदद करे… या मेरे साथ रहे… हमेशा के लिए।"

आखिरी पल

अब गाड़ी अपने आप धीमी होने लगी। स्टीयरिंग मेरे हाथ में होते हुए भी, मैं उसे कंट्रोल नहीं कर पा रहा था।

वो औरत धीरे-धीरे मेरी तरफ झुकने लगी। उसकी सांस ठंडी थी… जैसे बर्फ।

"अब तुम अकेले नहीं रहोगे…"

उसकी आंखें अब मेरे चेहरे के बिलकुल सामने थीं।

मैंने चीखने की कोशिश की… लेकिन आवाज नहीं निकली।

सुबह की खामोशी

अगली सुबह, उस हाईवे पर एक टूटी हुई कार मिली। अंदर कोई नहीं था… बस ड्राइवर की सीट पर खून के निशान थे।

लोगों ने कहा, ये एक और हादसा है।

लेकिन कुछ लोगों ने कसम खाई कि उन्होंने रात में एक औरत को देखा… जो सड़क किनारे खड़ी थी… लिफ्ट मांगते हुए।

अब भी इंतजार

आज भी, अगर आप उस हाईवे से रात 2 बजे गुजरें… तो शायद आपको वो दिख जाए।

सफेद साड़ी में… बाल चेहरे पर बिखरे हुए…

और अगर आपने गाड़ी रोक दी…

तो हो सकता है… वो इस बार आपकी सीट पर बैठे।

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